Skip to main content

Diet for Paralysis Patient: लकवे के मरीज़ अपनी डाइट से करें लकवा के असर को कम,




Diet for Paralysis Patient: लकवे के मरीज़ अपनी डाइट से करें लकवा के असर को कम, जानिए बेस्ट डाइट

 

 



Dr. F. A. Khan के मुताबिक लकवा एक ऐसी गंभीर बीमारी है, जिसका जल्द उपचार नहीं किया जाए, तो मरीज़ तमाम उम्र इस बीमारी को मात नहीं दे सकता। इस बीमारी का मुख्य कारण दिमाग के एक हिस्से में खून का प्रवाह रुकने की वजह से उस हिस्से को होने वाली क्षति होता है। लकवा के मरीज़ों की बात करें तो करीब 85 %  लोगों में दिमाग की खून की नली अवरुद्ध होने पर और करीब 15 %  में दिमाग में खून की नस फटने से लकवा होता है। लकवे का असर बॉडी के किसी भी हिस्से पर हो सकता है। स्ट्रोक की वजह से शरीर का आधा हिस्सा लकवा से ग्रस्त हो सकता है। इस बीमारी के कारण मुंह, होंठ या संबंधित अंग टेढ़े हो जाते हैं। आइए जानते हैं कि लकवा के मरीज़ों की डाइट कैसी हो और उन्हें किन चीज़ों से परहेज करना चाहिए। 

 

 



लकवा के मरीज क्या खाएं? 

§  लकवा के मरीज़ अनाज में गेहूं, जौ, और बाजरा का सेवन करें।

§  दालों की बात करें तो उनके लिए मूंग की दाल और कुलथ बेहद फायदेमंद है।

§  सब्जियों में मरीज़ को चाहिए कि वो हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, सहजन, पत्ता गोभी और ब्रोकोली का सेवन करें।

§  फलों में मरीज अपनी डेली डाइट में  अनार, फालसा, अंगूर, हल्दी, सेब, पपीता, संतरा, चेरी और तरबूजा खाए।

 


लकवा के मरीज़ इन चीज़ों से सख्त करें परहेज़:

1.        मैदा, अरहर, मटर, चना से परहेज करें।

2.        फल और सब्जियों की बात करें तो आलू, टमाटर, नींबू, जामुन, करेला, केला, भिंडी और मूंगफली से दूरी बनाएं।

3.        तेल और घी के अधिक सेवन से परहेज करें। इसके अलावा सुपारी, ज्यादा नमक, पूरी, समोसा, चाट-पकोड़ा, मक्खन, आइसक्रीम, चाय, काफी से भी परहेज करें।

4.        भारी भोजन जैसे छोले, राजमा, उड़द चना मटर सोयाबीन, बैंगन, कटहल जैसी चीजें बिल्कुल नहीं खाएं।

5.        ठंडी चीजें, पनीर और चॉकलेट से परहेज़ करें।

6.        तैलीय मासलेदार खाना, नॉनवेज, अचार, कोल्ड ड्रिंक्स, बेकरी उत्पाद, शराब, फ़ास्ट फ़ूड, डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ से परहेज करें। 

 

लकवा के इलाज के दौरान अपनाएं ये डाइट प्लान 

सुबह उठकर बिना ब्रश किये ही खाली पेट 1-2 गिलास गुनगुना पानी पिएं । 

 

डाइट चार्ट 

समय

संतुलित  आहार योजना

नाश्ता (8 :30 AM )

1 कप दूध + 2-3 बिस्कुट /हल्का नमकीन, दलिया /पोहा /उपमा (सूजी) / कार्नफ्लेक्स /अंकुरित अनाज (स्प्राउट्स) / 2 पतली रोटी + 1 कटोरी सब्जी + फलो का सलाद (सेब, पपीता, चेरी, तरबूज आम, अनार, फालसा, अंगूर)

दिन का भोजन  (12:30-01:30 PM

2-3 पतली रोटियां + 1 कटोरी चावल (मांड रहित ) + 1 कटोरी हरी सब्जिया (उबली हुई ) + 1 कटोरी दाल (पतली ) + 1 प्लेट सलाद

शाम का जलपान           (5:30 – 6 :00 pm)

1 कप हर्बल चाय (दिव्य पेय ) + 2-3 बिस्कुट (आरोग्य, पतंजलि) /सब्जियों का सूप )

रात्रि का भोजन              (7: 00 – 8:00 Pm)

2-3 पतली पतली रोटियां (पतंजलि मिश्रित अनाज आटा) + 1 कटोरी हरी सब्जियां (रेशेदार + 1 कटोरी दाल (पतली )

रात्रि से पूर्व (30 मिनट सोने से पहले )

1 गिलास दूध के साथ पतंजलि अश्वगंधा चूर्ण 


Comments

Popular posts from this blog

FROZEN SHOULDER & Best Physiotherapy Exercises by Dr F. A. Khan MPT(Neurology)

FROZEN SHOULDER : Causes, Symptoms, Treatment & Best Physiotherapy Exercises  Frozen Shoulder क्या है? (What is Frozen Shoulder?) Frozen Shoulder, जिसे मेडिकल भाषा में Adhesive Capsulitis कहा जाता है, कंधे (Shoulder) की एक ऐसी स्थिति है जिसमें कंधे के जोड़ के चारों ओर मौजूद कैप्सूल में सूजन (Inflammation) और जकड़न (Stiffness) आ जाती है। समय के साथ यह कैप्सूल मोटा और सख्त हो जाता है, जिससे कंधे की हर दिशा में मूवमेंट कम हो जाती है और दर्द बढ़ने लगता है। इस समस्या में व्यक्ति को हाथ ऊपर उठाने, पीछे ले जाने, बाल संवारने, कपड़े पहनने, जेब से सामान निकालने या सिर के ऊपर कोई वस्तु रखने जैसी सामान्य गतिविधियाँ करने में कठिनाई होती है। कई मरीजों को रात के समय दर्द अधिक महसूस होता है, जिससे नींद भी प्रभावित हो सकती है फ्रोजन शोल्डर आमतौर पर 40 से 60 वर्ष की आयु के लोगों में अधिक देखा जाता है। यह मधुमेह (Diabetes), थायरॉयड की समस्या, कंधे की चोट, सर्जरी के बाद लंबे समय तक हाथ न हिलाने, स्ट्रोक या कुछ अन्य न्यूरोलॉजिकल स्थितियों के बाद होने की संभावना अधिक रहती है। Dr F A khan के अनुसार...

अच्छी और खराब पोस्चर (Good Posture vs Bad Posture): आपकी सेहत पर इसका क्या असर पड़ता है?

अच्छी और खराब पोस्चर (Good Posture vs Bad Posture): आपकी सेहत पर इसका क्या असर पड़ता है? आजकल अधिकांश लोग घंटों तक मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर का उपयोग करते हैं। गलत तरीके से बैठने, खड़े होने या चलने की आदत धीरे-धीरे खराब पोस्चर (Bad Posture) का कारण बन जाती है। यही आदत आगे चलकर गर्दन, कंधे और कमर के दर्द जैसी कई समस्याओं को जन्म देती है। सही और गलत पोस्चर: जानें सही बॉडी पोस्चर क्यों जरूरी है और फिजियोथेरेपी की भूमिका आज के डिजिटल युग में, जब हम दिन का ज्यादातर समय मोबाइल स्क्रीन के सामने, कंप्यूटर पर या गलत तरीके से बैठकर बिताते हैं, तो पोस्चर (Posture) से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। पीठ दर्द, गर्दन में अकड़न, और कंधों का झुकना अब आम बात हो गई है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक सही पोस्चर केवल दिखने में अच्छा नहीं लगता, बल्कि यह आपके संपूर्ण शारीरिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है? आइए समझते हैं कि सही और गलत पोस्चर में क्या अंतर है और फिजियोथेरेपी इसमें आपकी कैसे मदद कर सकती है। 1. पोस्चर (Posture) क्या है? पोस्चर वह स्थिति (Position) है जिसमें आप खड़े होते हैं, बैठते हैं, सोते है...

About us :- Dr. F. A. Khan (faiz alam khan)

  Dr. F. A. Khan   MPT(NEURO) Doctor Of Physical Therapy (DPT),BPT, DNHE, CCP, MTFI Physiotherapist 15  Years Experience Overall Dr. F. A. Khan is a Physiotherapist in Indira Nagar, Lucknow and has an experience of 15 years in this field. Dr. F. A. Khan practices at Alams Physiotherapy & Homoeopathic Clinic (NEURO ALAMS CLINIC) in Indira Nagar, Lucknow. He completed Doctor Of Physical Therapy (DPT) from U.P State Medical Faculty in 2007,BPTh/BPT from MEERUT UNIVERSITY in 2012 and DNHE from IGNOU in 2013 AND MASTER IN NEURO 2018 DONE. He is a member of Indian Association of Physiotherapist. Some of the services provided by the doctor are: Occupational Physiotherapy, Rehabilitation Therapy and Consultant Physiotherapy etc. Master in NEURO Related disorder.... MOB. 8960-50-7080 EMAIL;   alamsclinic@gmail.com