अर्थराइटिस के मरीज़ों के लिए फिजियोथेरेपिस्ट के बताए 5 खास टिप्स
मांसपेशियों और जोड़ों के दर्द में आपको फिजियोथेरेपी से आराम मिल सकता है अगर आप डॉक्टर की सलाह और देख-रेख में थेरेपी करें। वहीं आजकल एक समस्या जो कई लोगों में देखने को मिल रही है वो है अर्थराइटिस। ये अब कम उम्र के लोगों के लिए भी एक बड़ी चिंता बनता जा रहा है और कई लोगों में तअर्थराइटिस असल में शरीर के जोड़ों की d. एक स्थिति है जिसमें जोड़ों में सूजन आ जाती है और इसका सबसे पहला लक्षण इनमें अकड़न ही होता है। ये उम्र के साथ और गंभीर और दर्दभरा हो जाता है।
वैसे तो अर्थराइटिस के कई प्रकार होते हैं पर ये प्रमुख दो प्रकारों से विभाजित किया जाता है। ओस्टियोअ BB wर्थराइटिस और रुमेटॉइड अर्थराइटिस। रुमेटॉइड एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है जिसमें जॉइंट कैप्सूल प्रभावित होता है और इससे जोड़ों में सूजन आती है और अंतत: जॉइंट कार्टिलेज प्रभावित होती है। ओस्टियोअर्थराइटिस रोजमर्रा की आंतरिक टूट-फूट के कारण होता है।
इन दोनों ही अर्थराइटिस के कारण कई बार लोगों को बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पर अर्थराइटिस के मरीज़ों को अपनी दिनचर्या में क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए जिससे उन्हें फायदा मिले ।
वो टिप्स जो अर्थराइटिस के मरीज़ों के लिए हो सकते हैं बेहतर-
1. एक्सरसाइज- EXERCISES
वैसे तो अर्थराइटिस के मरीज़ों के लिए कई बार उठना बैठना भी मुश्किल होता है, लेकिन अगर सही फिजियोथेरेपी की जाए तो उनकी मांसपेशियों में ताकत आ सकती है जिससे जॉइंट्स में घर्षण कम होता है। Dr. F. A. Khan के मुताबिक आपको अपने फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह के साथ ही एक्सरसाइज तय कर लेनी चाहिए।
काम की टिप-
Dr. F. A. Khan के मुताबिक क्वाड्रीसेप्स (QUADRICEPS, THIGH
MUSCLES) हैमस्ट्रिंग्स (HAMSTRING, & CALF
MUSCLES) की ट्रेनिंग लेना सबसे लाभकारी साबित हो सकता है। अधिकांश फिजियोथेरेपिस्ट इसकी ही सलाह देते हैं।
2. पॉश्चर- POSTURE
अर्थराइटिस में आराम देने के लिए सही पॉश्चर का होना बहुत जरूरी है जिससे इंसान जॉइंट पेन से बच सके। ये दर्द हमेशा हमारे गलत उठने बैठने के तरीके से और ज्यादा बढ़ जाता है। पैर किस तरह से रखना है ये भी आपको फिजियोथेरेपिस्ट बता सकता है जिससे आपका पेन कुछ कम हो।
काम की टिप-
Dr. F. A. Khan के मुताबिक आपको ज्यादा देर तक घुटने मोड़कर बैठने से बचना चाहिए। ऐसा करने से कार्टिलेज पर ज़ोर पड़ता है और जॉइंट्स पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। ये जोड़ों के दर्द का एक मुख्य कारण बन सकता है।
3. वजन पर नियंत्रण-
WEIGHT CONTROL
अगर आपको अर्थराइटिस की समस्या है तो ये बहुत जरूरी है कि आप अपना वजन नियंत्रित कर लें क्योंकि इसके बढ़ने से जॉइंट्स पेन बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और एक स्टडी के मुताबिक अगर बॉडी का एक किलो वजन बढ़ता है तो इसे जॉइंट में ये 4 किलो माना जाता है। ये भी कार्टिलेज के डैमेज होने का प्रमुख कारण बन सकता है।
काम की टिप-
अगर आपका वजन बढ़ रहा है तो आप उसे खाने-पीने से भी कंट्रोल कर सकते हैं, लेकिन तब भी एक्सरसाइज बहुत जरूरी होगी।
4. चोट से बचें- PREVENT INJURIES
अगर आपको अर्थराइटिस है तो छोटी सी चोट भी घातक हो सकती है। इसलिए हर रोज़ सावधानी बरतनी जरूरी है और दीवार से टकराना या फिर गिरना बहुत ज्यादा समस्या पैदा कर सकता है।
काम की टिप-
Dr. F. A. Khan मुताबिक अक्सर लोग दर्द में अपने घुटनों में हाथ मारते हैं और बार-बार अपने जोड़ों पर हाथ मारना भी माइक्रोट्रॉमा (MICRO- TRAUMA)कहा जाता है जिससे जोड़ों का दर्द और ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसा करने से बचना चाहिए, इससे आप दर्द को कम नहीं करते बल्कि बढ़ा देते हैं।
5. संतुलित आहार- PROPER DIET
अर्थराइटिस के मरीज़ों को विशेषज्ञ की देखरेख में संतुलित आहार लेना चाहिए। कैल्शियम और विटामिन-डी (VITAMIN-D)की कमी बिल्कुल नहीं होनी चाहिए, जिससे जोड़ों के दर्द में आराम मिल सके।
काम की टिप-
Dr. F. A. Khan मुताबिक एक्सरसाइज के साथ-साथ आप डाइट चार्ट भी बनवा लें ताकि आप अपना वजन कंट्रोल कर सकें। स्वस्थ आहार शरीर को कई तरह की समस्याओं से बचाता है।
खास टिप्स - ADVICE
फिजियोथेरेपिस्ट के हिसाब से आपको इन 5 बातों का ध्यान रोज़ाना रखना होगा। अगर कोई अपना ध्यान ठीक तरह से नहीं रख रहा है तो उसे आगे चलकर ज्यादा समस्या होगी। जिसके घर में पहले भी किसी को अर्थराइटिस हो चुका है उसे शुरुआत से ही अपने शरीर का ख्याल रखना चाहिए। तो अगर आप भी जोड़ों के दर्द या अर्थराइटिस की समस्या से परेशान हैं तो अपने डॉक्टर से सलाह लें।